गुरुवार, 19 मार्च 2026

मुद्दा आज भी जीवित है...

 मुद्दा आज भी जीवित है. साहित्य के माफिया निहायत बेशर्मी से मौन साध कर महाकवि का मुकुट धारण किए भ्रमण कर रहे हैं .क्या ऐसे अपराधों का संज्ञान हमारा हिंदी जगत् और इसके मठाधीश कभी नहीं लेंगे?

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हम ऐसे युग में जीने को विवश हैं, जिस में चोर खुद को आसानी और बेहयाई से महान घोषित कर देते हैं...

  सुन रहा हूँ, कवि नरेश सक्सेना के साथ हुआ अपराध और यह भी कि वे व्यथित हो कर एकान्त वास में चले आते वे। सक्सेना जी,चोर अब 'महान' समझ...