गुरुवार, 19 मार्च 2026

शून्य का एहसास

मेरी रिक्तता का बोध और
शून्य का एहसास कह रहा
ओ मेरी प्रतिभा मर जाओ
जिन्दगी जुआ जब बन जाये
तब हार जीत के क्या माने।
मैंने सोचा है
मेरी मौत वहाँ हो
जहाँ-न कोई गीध हो
न चील,न कुत्ता,न स्यार
न घड़ियाल
और न कोई-
घड़ियाली आँसू हो।

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