Shashank Shukla, Shivshankar Mishra के साथ हैं.
30 जुलाई 2021 ·
आज आदरणीय डॉ शिवशंकर मिश्र जी का कहानी संग्रह 'अंतिम उच्चारण' मिला। कहानी में छः कहानी संग्रहीत हैं। अंतिम उच्चारण, बाबा की उघन्नी, मूरतें, मुनुआ की वीरगति, पखावज, मुजरिम। इनमें पखावज कहानी अवांतर कारणों से चर्चित रही है। वर्षों पहले संभवतः कथादेश में बाबा की उघन्नी पढ़ी थी, तभी शिवशंकर मिश्र जी के कहानी कहन के ढंग से प्रभावित हुआ था। संग्रह की अंतिम कहानी मुजरिम 101 पेज की लंबी कहानी है। युवा कहानी में लंबी कहानी एक प्रचलित शिल्प विधान रहा है।
आज आदरणीय डॉ शिवशंकर मिश्र जी का कहानी संग्रह 'अंतिम उच्चारण' मिला। कहानी में छः कहानी संग्रहीत हैं। अंतिम उच्चारण, बाबा की उघन्नी, मूरतें, मुनुआ की वीरगति, पखावज, मुजरिम। इनमें पखावज कहानी अवांतर कारणों से चर्चित रही है। वर्षों पहले संभवतः कथादेश में बाबा की उघन्नी पढ़ी थी, तभी शिवशंकर मिश्र जी के कहानी कहन के ढंग से प्रभावित हुआ था। संग्रह की अंतिम कहानी मुजरिम 101 पेज की लंबी कहानी है। युवा कहानी में लंबी कहानी एक प्रचलित शिल्प विधान रहा है।
लेखक परिचय में माता-पिता का नाम दर्ज़ है, जो लेखक के जड़ों से जुड़ाव का संकेत समझना चाहिए। उचित ही है कि पुस्तक पिता को समर्पित है।
पुस्तक में भूमिका नहीं है। लेखक का मानना है कि कहानी स्वयं में एक भूमिका होती हैं। अतः कहानी स्वयं एक पूर्व कथन और मुख्य कथन है।
शिवशंकर मिश्र कम लिखते हैं, किन्तु ठहराव के साथ लिखते हैं। आपको पढ़ना ठहर कर ही सम्भव है। शेष पाठ के बाद...
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