‘जश्न’ : सबाल्टर्न अस्मिता, प्रतीकात्मक सत्ता और ग्रामीण सांस्कृतिक चेतना का समाजशास्त्रीय पाठ
‘जश्न’ कहानी पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करें - https://aakhyaan.blogspot.com/2010/05/blog-post_24.html "जश्न'' सबाल्टर्न subaltern अस्मिता का आख्यान है आदरणीय डॉ. शिवशंकर मिश्र की कहानी ‘जश्न’ भारतीय ग्रामीण समाज के वंचित वर्गों की अस्मिता, प्रतीकात्मक सत्ता और सामाजिक प्रतिष्ठा की आकांक्षा का एक महत्त्वपूर्ण आख्यान है। 'सबाल्टर्न' (Subaltern) शब्द मूल रूप से अंतोनियो ग्राम्शी Antonio Gramsci (1891–1937) ने इस्तेमाल किया था। बाद में भारतीय इतिहासकारों के एक समूह Subaltern Studies Group ने इसे लोकप्रिय बनाया। सबाल्टर्न (Subaltern) का अर्थ है — समाज के वे लोग या समूह जो सत्ता, संसाधनों, प्रतिष्ठा और निर्णय लेने की मुख्य धारा से बाहर रखे गए हों। जब कोई कहानी, उपन्यास या कविता उन लोगों के जीवन-संघर्ष, पीड़ा, प्रतिरोध और अस्मिता को केंद्र में रखती है, जिन्हें समाज ने हाशिये पर धकेल दिया है, तो उसे सबाल्टर्न विमर्श से जुड़ा माना जाता है। "जश्न" में सबाल्टर्न कौन है? इस कहानी में अनंतर...