नाद ब्रह्म : संगीत की अनंत कहानी
संगीत केवल कला नहीं है। यह मनुष्य की अनुभूति, प्रकृति की लय और आत्मा की अभिव्यक्ति का संगम है। यदि पूछा जाए कि संगीत कब और कैसे आया, तो इसका उत्तर केवल इतिहास में नहीं, बल्कि मनुष्य के हृदय, उसकी संवेदनाओं और उसकी आध्यात्मिक खोज में भी छिपा हुआ है। संगीत का जन्म किसी एक दिन नहीं हुआ। वह धीरे-धीरे मनुष्य के भीतर अंकुरित हुआ, जैसे बीज से वृक्ष विकसित होता है। जब शब्द नहीं थे, तब भी संगीत था..... कल्पना कीजिए उस समय की, जब मनुष्य ने भाषा का विकास नहीं किया था। वह बोल नहीं सकता था, लेकिन वह महसूस करता था। उसे भय लगता था, प्रसन्नता होती थी, प्रेम होता था, दुःख होता था। जब वह प्रसन्न होता, तो उसकी आवाज़ में एक विशेष लय आ जाती। जब वह दुखी होता, तो उसकी ध्वनि बदल जाती। यही भावपूर्ण ध्वनियाँ संगीत के प्रथम बीज बनीं। संगीत किसी एक व्यक्ति का आविष्कार नहीं है। वह प्रकृति की गोद में जन्मा, मानव हृदय में पला और आध्यात्मिक अनुभवों से विकसित हुआ। वह पक्षियों के गीतों में था, माँ की लोरी में था, ऋषियों के ध्यान में था और आज भी हर धड़कते हुए हृदय में मौजूद है। संगीत इसलिए नहीं बना कि म...