'काश होती कमीज पर कविता' [कहानी संग्रह] : शिव शंकर मिश्र

📖 'काश होती कमीज पर कविता'

शिव शंकर मिश्र का कहानी संग्रह

🌟 पुस्तक परिचय

'काश होती कमीज पर कविता'' सुप्रसिद्ध साहित्यकार शिव शंकर मिश्र की 7 चुनिंदा कहानियों का एक सशक्त संग्रह है। यह कृति समाज के कड़वे यथार्थ, मानवीय संवेदनाओं और आम आदमी के नैतिक संघर्ष को बेबाक ढंग से रेखांकित करती है।


📚 संग्रह की कहानियाँ:

  1. काश होती कमीज पर कविता: आम आदमी की साधारण ज़रूरतों के पीछे छिपा गहरा जीवन-दर्शन।
  2. पखावज वृत्तांत: कला, संगीत और जीवन की व्यावहारिक जटिलताओं का चित्रण।
  3. हराम की नहीं: घोर अभावों के बीच आत्मसम्मान और ईमानदारी की प्रेरक गाथा।
  4. पात्रता: सामाजिक योग्यता के मुखौटों और इंसानी चरित्र का सूक्ष्म विश्लेषण।
  5. जश्न्: शोषक व्यवस्था के बीच भी जीवन जीने और खुशी तलाशने की जिद।
  6. चिता पर मंथावा: खोखली सामाजिक रीतियों और यथार्थ पर मर्मभेदी प्रहार।
  7. जालिम: सत्ता के अहंकार और क्रूरता के खिलाफ आम इंसान का मूक संघर्ष।

✍ लेखक के बारे में

शिव शंकर मिश्र हिंदी साहित्य के यथार्थवादी रचनाकार हैं। इनकी आडंबरहीन शैली पाठकों को झकझोरती है और समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के दर्द से रूबरू कराती है।


📊 पुस्तक विवरण

  • पुस्तक का नाम : काश होती कमीज पर कविता
  • विधा : कहानी संग्रह | लेखक : शिव शंकर मिश्र | भाषा : हिंदी
  • प्रारूप : डिजिटल फ्लिपबुक (Digital Flipbook)

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KASH HOTI KAMEEJ PAR KAVITA

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“साहित्य समाज का वह जीवंत दर्पण है जो मनुष्य को उसकी वास्तविक चेतना से रूबरू कराता है।”

इस संग्रह को पढ़िए और कमेंट बॉक्स में अपने विचार साझा करना न भूलें。

- MUKTAABH

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