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अभाव की छाया में संवेदना का प्रकाश

प्रस्तावना मानव जीवन अनुभवों का विस्तृत संसार है। इन अनुभवों में सुख और दुःख, समृद्धि और अभाव, उपलब्धि और संघर्ष सभी सम्मिलित हैं। मनुष्य समृद्धि को जीवन का आदर्श मानता है और अभाव को एक ऐसी स्थिति के रूप में देखता है, जिससे यथासंभव बचा जाना चाहिए। किंतु यदि जीवन को गहराई से समझा जाए, तो ज्ञात होता है कि अभाव केवल कमी का नाम नहीं है। अनेक बार यही अभाव मनुष्य को उसके वास्तविक स्वरूप से परिचित कराता है और उसके भीतर संवेदना, करुणा तथा मानवता के श्रेष्ठ गुणों का विकास करता है। संवेदना मनुष्य को मनुष्य बनाती है। यह वह शक्ति है, जिसके कारण हम दूसरों के सुख-दुःख को समझ पाते हैं। प्रश्न यह है कि यह संवेदना जन्म कहाँ लेती है? क्या यह केवल शिक्षा से आती है, या फिर जीवन के संघर्ष और अभाव इसके निर्माण में अधिक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं? इस प्रश्न का उत्तर हमें मानव इतिहास, साहित्य और समाज के अनुभवों में मिलता है। वास्तव में अभाव और संवेदना का संबंध अत्यंत गहरा और अविभाज्य है। अभाव का व्यापक अर्थ 'अभाव' शब्द सुनते ही प्रायः आर्थिक कठिनाइयों का विचार मन में आता है, किंतु अभाव का अर्थ केव...

जब उँगलियाँ स्क्रीन पर दौड़ने लगीं, तब किताबें पीछे क्यों छूट गईं

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“किताबें केवल ज्ञान नहीं देतीं, वे जीवन को सोचने, समझने और बेहतर बनाने की दिशा भी देती हैं।” प्रस्तावना किताबें मानव सभ्यता की सबसे मूल्यवान धरोहरों में से एक हैं। उन्होंने न केवल ज्ञान का प्रसार किया है, बल्कि मनुष्य के विचारों, भावनाओं और संस्कारों को भी समृद्ध बनाया है। एक समय था, जब पुस्तकें जीवन का अभिन्न हिस्सा हुआ करती थीं। लोग अपने खाली समय में किताबें पढ़ते, पुस्तकालयों में जाते और साहित्य से अपने व्यक्तित्व को निखारते थे। लेकिन आज का समय पहले जैसा नहीं रहा। तकनीक के तेज़ विकास और डिजिटल माध्यमों के विस्तार ने लोगों की जीवनशैली को पूरी तरह बदल दिया है। आज की युवा पीढ़ी पहले की तुलना में पुस्तकों से दूर होती दिखाई देती है। मोबाइल फोन, सोशल मीडिया, वीडियो प्लेटफॉर्म और त्वरित मनोरंजन के साधनों ने किताबों के लिए उपलब्ध समय को कम कर दिया है। यह केवल पढ़ने की आदत में बदलाव नहीं है, बल्कि हमारी बौद्धिक और सांस्कृतिक जीवनशैली में आए बदलावों का संकेत भी है। प्रश्न यह है कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है और इस स्थिति को कैसे सुधारा जा सकता है? किताबों से दूरी के प्रमुख कारण 1. डिजिटल दुनिया ...